आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का जीवनी । Biography Of aachary ramchandra shukl.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

 आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का जन्म सन् 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना नामक गांव में हुआ था । उन्होंने शिक्षा इंटरमीडिएट तक ग्रहण की उसके पश्चात उन्होंने मिर्जापुर के में अध्यापन का कार्य शुरू किया । आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी आधुनिक युग के श्रेष्ठ निबंधकार है । शुक्ल जी को साहित्य के प्रति बहुत लगाव था । वे साहित्य के क्षेत्र में इतना लगाव रखते थे की वे अखबार में अपने आलेख प्रकाशित करने लगे । इस तरह शुक्ल जी काफी चर्चित हो गये उनकी रचना लोगों को पसंद भी आने लगी । शुक्ल जी अपनी रचनाओं में विशुद्ध खडी बोली का प्रयोग करते हैं । इनकी रचनाओं में आपको मुहावरों का बाहुल्य मिल जाएगा । जो शुक्ल जी की रचनाओं को और भी प्रभावकारी बनाती है । इनकी रचना लोगों को पसंद आने लगी । उनकी रचनाओं से प्रभावित होकर काशी नागरी प्रचारिणी सभा नें उन्हें ‘ हिन्दी सागर ‘ के संपादक मंडल ने नियुक्त किया । इस कार्य में उन्होंने अपनी योग्यता का प्रसंसनिय परिचय दिया । इस कारण से उनकी बनारस विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में इनकी नियुक्ति हुई ।


 प्रमुख रचनाएें   – चिन्तामणी (भाग 1-2), जायसी ग्रंथावली, तुलसी ग्रंथावली, भ्रमरगीतसार ।

 Important note – अगर आपको शुक्ल जी की जीवनी में कोई बात गलत लगती है तो कृपया कामेन्ट करके जरूर बताएं । 

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