कबीर दास ते ऐसे दोहे जो जिंदगी के सच्चाई को बताती है आपको जरूर पढना चाहिए ।

कबीरदास जी सबसे ज्यादा प्रचलित कवी हैं इनकी रचनाऐं एकदम स्पष्ट और गाने योग्य है इनकी रचनाओं को पढकर पाठक के हृदय में में एक अलग सी लहर उठ जाती है । मै आज आपको ऐसे ही लोकप्रिय कविताओं के बारे में बताउंगा । आप ये पोस्ट hindihelpyar.com पर पढ रहे हैं जो अभी हाल ही में अपना एक अलग स्थान इंटरनेट पर बनाती है यहां आपको बेस्ट हिंदी पोस्ट मिल जाएगी । इस ब्लाग में रोचक तथ्य पोस्ट की जाती है वो भी हिंन्दी में । अब अपने पोस्ट को आगे बढाते है मै आपको कबीर के बेस्ट प्रचलित दोहों के बारे मे बताऊंगा ।

दुर्लभ मानुष जनम है, देह न बारंबार ।

तरवर ज्यों पत्ता झडे, बहुरिन लागै डार ।

अर्थात मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है बार बार नहीं मिलता इसलिए कभी किसी चिज पर घमंड नही करनी चाहिए जिस प्रकार एक बार पेड से पत्ता गिर जाता है दोबारा नहीं जुडता उसी प्रकार एक बार मृत्यु मिल जाने के बाद जिंदगी दोबारा नहीं मिलती ।

सोना, सज्जन ,साधुजन, टूटी जुरै सौ बार ।

दुर्जन कुंभ कुंभार के एकै धरा दरार ।।

अर्थात् सोना सज्जन और साधु उनका अपमान करने से वे सौ बार दुखी होते हैं पर वे अंदर से सच्चे दिल वाल े होते हैं इसलिए अपने आपको संभाल लेते हैं पर बुरे लोग कुंभारलके घडे के समान होते हैं जो एक हल्के से ठोकर से टुटकर चुर चुर हो जाते हैं दोबारा नहीं जुडते इसलिए मुसीबत से घबराना नहीं मुसीबत का डटकर सामना करना सिखें ।

 गोधन, गजधन, बाजिधन और रतन सब खान ।

जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान ।

अर्थात् अगर आपके पास गाय, हाथी, घोडा, सोने, हीरे मोती हैं और संतोष धन नहीं हैं तो ये सभी धन धुल के समान है ।

कबीरा गर्व न कीजिए, ऊँचा देख आवास ।

काल परै भुंइ लेटना, ऊपर जामि है घास ।

अर्थात अपने इस बडे मकान को देखकर गर्व न करे की मेरे पास इतना संपती नही है । एक बार मृत्यु हो जाने के बाद आपको इस जमिन पर ही लेटना है और आपके घास उगना है । इसलिए कभी भी अपने आवास पर गर्व न करें ।

कबीरा यह तन जात है, सकै तो राख बहोर ।

खाली हांथो वे गए, जिनके लाख करोर ।

अर्थात कबीर जी कहते हैं की अपने धन संपत्ति को सकेल सकते हो तो सकेल लो क्योंकि जो भी लखपत्ति करोडपति हैं वो खाली हाथ ही गए हैं मरने के बाद वे सभी अपना कुछ नहीं ले पाए हैं ।

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